डीजल गाड़ियों पर आया बड़ा अपडेट, नितिन गडकरी का बयान

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देश में क्रूड आयल के भावो में उतार चड़ाव होता रहता है क्युकी भारत को आयल बाहर देशो से इम्पोर्ट करना पड़ता है दूसरी और डीजल गाड़ियाँ भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली हैं और यह सबसे प्रचलित पॉवरट्रेन भी बन चुकी हैं। विशेष रूप से, जब से भारत में SUV का प्रचलन बढ़ा है, लोग अपनी SUV को ज्यादा माइलेज और शक्ति प्रदान करने वाले डीजल गाडियों को  पसंद करते हैं। आने वाले समय में, भारत में डीजल गाड़ियों की कीमतों में 6.5% की वृद्धि हो सकती है, एसा अनुमान लगाया जा रहा है ।

क्या है किमत बढ़ने का कारण 

हर दिन डीजल की बढ़ती कीमतों के अलावा, एक बड़ा कारण ईंधन की महंगाई है। डीजल कीमत दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, और इसमें उच्च कर, ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमत, और मुद्रा कीमत में चढ़ाव और गिरावट के कारण बढ़ोतरी है। पिछले कुछ सालों में, डीजल की कीमत 40% से भी ज्यादा बढ़ चुकी है।इसके अलावा, डीजल गाड़ियों की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे एक और कारण हो सकता है, जैसे कि डीमांड भी मार्केट में धीरे धीरे बढ़ रही है । 

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ऊपर बताए गए सभी कारणों के कारण, ग्राहक अब डीजल इंजन की बजाय CNG या इलेक्ट्रिक वाहनों  की ओर बढ़ रहे हैं। ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, डीजल गाड़ियों के सेगमेंट में FY2016 से अगर तुलना की जाए, तो 58% की गिरावट देखने को मिली है।

वाहनों का मार्केट शेयर भी गिरा है 

दूसरी और बात की जाये तो  FY2021 से तुलना की जाए, तो FY2023 में यह मार्केट शेयर 29% से गिर चुका है। और भविष्य के लिए कहा जा रहा है कि FY2025 तक डीजल गाड़ियों का यह मार्केट शेयर 15-18% तक और भी कम हो सकता है। इसके बावजूद, ऑटोमोबाइल निर्माताओं को अपनी गाड़ियों के मूल्यों को बढ़ाकर अपने निवेश को लौटाने और अपने लाभ को प्राप्त करने के लिए अपने डीजल वाहनों में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं।

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सरकार का नया नियम 

दुसरी और बात की जाये की भारत में Stage 6 (BS6) इमिशन मानक 1 अप्रैल 2020 से सभी गाड़ियों पर लागू हो गए हैं। इसके बाद से सभी नई गाड़ियों को इन नए नियमों का पालन करना होता है। इसके लिए ऑटोमोबाइल निर्माताओं को अपने डीजल वाहनों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन करने पड़ते हैं, जैसे कि इंजन और एक्जॉस्ट सिस्टम में परिवर्तन, जहां पर डीजल पार्टिकुलेट फ़िल्टर (DPFs), सेलेक्टिव कैटलिटिक रिडक्शन (SCR) सिस्टम, और यूरिया इंजेक्शन सिस्टम जैसे घटकों को गाड़ी में लगाना होता है। इसके कारण गाड़ी के निर्माण और रखरखाव के लिए कुल लागत भी बढ़ जाती है, और साथ ही इसकी ईंधन की कमी होती है।

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